क्या हो गया अंत आतंकवाद का ?

क्या हो गया अंत आतंकवाद का ?
पूरे विश्व में जबरन अपना लोहा मनवाने पर अमादा अमेरिका ने आतंकवादी सरगना ओसामा बिन लादेन को मारकर क्या वाकई आतंकवाद का अंत कर दिया है ? ओसामा के मारनें के बाद सभी के ज़हन में उठने वाला सबसे पहला प्रश्न होगा। ऐसा प्रश्न जिसके उत्तर में शायद लोगों का कहना हो कि हां और कुछ का कहना हो ना, लेकिन सबसे ज्यादा विचारणीय बात यह है कि क्या कारण है कि ईस्लमिक देश इस राह को अपनाते है। क्या कभी किसी ने इसका कोई सही समाधान खोजने की कोशिश की है ?
मेरे इस प्रकार की बात कहनें का यह कतई मतलब नहीं कि ओसामा का मारा जाना गलत है पर मेरे कहने का साफ मतलब सिर्फ इतना है कि क्या कारण है कि लोग इस आतंकवाद की राह को अपनाते है यह एक गंभीर विषय है जिसको यदि सही प्रकार से समझा जाये तो समस्या का हल निकाला सकता है।
यदि इस समस्या को समझने का प्रयास करें तो एक बात खुलकर सामनें आती है कि जिन देशों में इस प्रकार की समस्या है वह देश कहीं ना कहीं अशांति और अस्थिरता की स्थिती में है जिसके कारण वहां शिक्षा, रोजगार, व्यवसाय इत्यादी से जुड़ी समस्याओं का वहां के लोगों को सामना करना पड़ता ऐसी ही कुछ स्थिती पाकिस्तान में देखी जा सकती है वहां शिक्षा, रोजगार जैसी समस्या इतनी ज्यादा है कि वहां कि सरकार चाह के भी उनके लिए कुछ नही कर सकती है।
यदि वास्तव में अमेरिका इसका हल चाहता है तो उसको चाहिए कि वह इस ओर कुछ ध्यान दे ताकि समस्या का अंत ही हो जाये। अब आप कहेंगे कि अमेरिका ही क्यों तो इसका आसान सा उत्तर है कि आतंकवाद का अंत करने का श्रेय भी तो वही लूटना चाहता है। मेरा आशय किसी पर किसी प्रकार का आरोप या व्यंग करना नही बस इस बात को स्पस्ट करना है कि जब बबूल उगेगा ही नही तो कांटे चुभेंगे कैसे ?


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