बिहार सीएम की सीट है या मुंगेरी लाल के हसीन सपने
बिहार सीएम का पद नहीं हुआ दंगल का मैदान हो गया है। लगता है नीतीश कुमार के ग्रह ठीक नहीं चल रहे हैं। तभी तो एक रात पहले बिहार के सीएम बनने का सपना देख रहे नीतीश कुमार का सपना सबेरा होते ही टूट गया। होगा कोई विधायक जो चला गया होगा पटना होईकोर्ट की शरण में इंसाफ के लिए। न्याय के प्रतीक माननीय न्यायाधीश ने न्याय सम्मत निर्णय दे दिया और छिन गया सत्ता का सुख नीतीश कुमार जी का। वाकई नीतीश जी ने बड़े पापड़ बेले थे दोबारा बिहार का सीएम बनने के लिए इतनी उठापटक की लेकिन एक फैसले ने उनके सारे अरमानों पर पानी फेर दिया। उनकी ख्वाहिशें मुंगेरी लाल के हसीन सपने की तरह फुर्र हो गए। सत्तासुख पाने की जल्दबाजी देखो कि परसों राज्यपाल के पास दावा किया कि मै सीए बनूंगा और कल 130 विधायकों समेत पहुंच गए दिल्ली राष्ट्रपति से मिलने। अब यह ग्रह का बिगाड़ नहीं तो और क्या है। फैसला आता लेकिन उनके सीएम बन जाने के बाद। भारतीय राजनीति में यह पहला मौका नहीं कि सत्ता के लिए इस प्रकार की उठापटक हो रही हो। ठीक इसी प्रकार का दौर उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र समेत कई अन्य प्रदेशों में भी आ चुका है। इन नेताओं की आपसी खींचतान में सबसे ज्यादा नुकसान किसी का हो रहा है तो वह है बिहार की जनता का जिसने आरजेडी को अर्श से फर्श पर लाया और जेडीयू को फर्श से अर्श पर बैठाया। इस आशा के साथ कि युवा हो रहे बिहार के हित में निर्णय लिए जाएंगे। बिहार की जरूरत के मुताबिक विकास होगा। लेकिन पिछले एक साल में दो बार सीएम बदलना बिहार की जनता को स्थिर सरकार देने के बजाय प्रदेश में आपसी खींचतान के कारण प्रदेशभर में अस्थिरता का माहौल बनाया जाना। यह बिहार की जनता के साथ विश्वासघात नहीं तो और क्या है यह एक सवाल है जिसका जवाब इनको आगामी बिहार विधानसभा चुनाव में देना होगा। यदी नहीं दिया तो फिर जनता तो है ही वोट से जवाब देने के लिए। हो सकता है कि इस अस्थिरता का फायदा आरजेडी या फिर बीजेपी को मिल सके। कितना फायदा यह तो आने वाला समय ही बताएगा। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि हाईकोर्ट द्वारा दी गई अगली सुनवाई में क्या फैसला आता है। संभव है कि यह अस्थिरता बरकरार रहे। मांझी ही सीएम बनें अपनी ही पार्टी पर वार और प्रहार करने के लिए। बस नुकसान जनता का ही होगा। शायद वो गाना यहां ठीक बैठे यह पब्लिक है सब जानती है...




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