गुगल जैसी कंपनियां हमारे यहां क्यों नहीं
भारत में औद्योगिकरण के साथ अनेकों उद्योगों ने भारत को अपना आशियाना बनाया। इनमें देशभर में ख्याति प्राप्त कई कंपनीयां शामिल है, लेकिन उन सभी में से किसी भी कंपनी ने अपने यहां काम करने वाले एम्प्लाइयों को वो सुविधाएं नहीं देती जो गुगल जैसी कंपनियां देती है। ताल्लुक सिर्फ सुविधाओं से नहीं बल्कि इस बात से है कि प्रतिस्पर्धा के इस युग में यदि हर चीज में कॉम्पीटिशन की बात होती है तो फिर एम्प्लाइयों को दी जाने वाली सुविधाओं के बारे में बात क्यों नहीं होती। महज कुछ समय में सबसे बड़ी कंपनियों में शुमार होने वाली गुगल ने जिस तरह से कंपनी की प्रगति पर ध्यान दिया ठीक उसी तरह उसने कंपनी के एम्प्लाइयों की प्रगति और उनकों स्वस्थ् वातावरण प्रदान करने पर भी ध्यान दिया। 1998 में शुरु हुई कंपनी ने देखते ही देखते एक बड़ा एम्पायर खड़ा कर दिया। यह भी नहीं की कोई 50-60 साल के किसी व्यक्ति ने कंपनी बनाई हो। कंपनी के निर्माता लैरी बताते हैं की वो और उनके दोस्त सेर्गे ब्रेन ने जब कंपनी बनाने की सोची तब उनकी उमर महज 26 साल के लगभग थी। दोनों ने जल्दी इस इस पर काम शुरु कर दिया। स्टेनफोर्ड युनिवर्सिटी से पढ़ाई पूरी करने के बाद दोनों ने इस पर काम करना शुरु कर दिया। आज विश्व के दस सबसे बड़ी कंपनियों में गूगल शामिल है। यह इस के इतर जो सबसे खास बात है वह यह है कि आज हर एम्प्लाई इस कंपनी में काम करने का ख्वाब देखता है, इसलिए नहीं कि यह कंपनी सबसे बड़ी है बल्कि इसलिए कि इस कंपनी ने काम में शत प्रतिशत आउटपुट पाने के लिए एम्प्लाइयों को हाउस फ्रेंडली एन्वायर्मेंट दिया। कहते हैं कि कंपनी में इन करने के बाद एम्प्लाइयों को घर जाने की इच्छा नहीं होती है। पूरा घर जैसा माहौल। जो चाहें वो मिलेगा कंपनी में। इतना ही नहीं कंपनी में यह जरूरी नहीं कि आप एक ही जगह बैठकर काम करेंगे। यह आपके उपर निर्भर करता है कि आप अपनी मूड़ के मुताबिक एन्वायरमेंट में काम कर सकते हैं। यदि काम से स्ट्रेस हो रहा हो तो आप बच्चों की तरह झूला झूल सकते हैं वो भी बिना कंपनी से बाहर गए। सब कुछ कंपनी मे ही। यही कारण है कि गूगल एक मात्र एेसी कंपनी है जिसको उसके एम्प्लाइयों से शत प्रतिशत आउटपुट मिलता है। भारत में सब कुछ होने के बावजूद भी यहां गूगल जैसी कोई कंपनी क्यों नहीं है इस पर विचार करना चाहिए।
वैसे कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि कंपनी को स्थापित करने वाले लैरी पेज और सेर्गें ब्रेन दोनों ही युवा हैं और दोनों ने ही इस बात को महसूस किया और अपने एम्प्लाइयों को एेसा वातावरण प्रदान किया कि आज वह सबसे बड़ी कंपनी है। आशा है इससे भारत की कंपनियां भी सबक लेकर अपने में बदलाव करेंगी।
वैसे कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि कंपनी को स्थापित करने वाले लैरी पेज और सेर्गें ब्रेन दोनों ही युवा हैं और दोनों ने ही इस बात को महसूस किया और अपने एम्प्लाइयों को एेसा वातावरण प्रदान किया कि आज वह सबसे बड़ी कंपनी है। आशा है इससे भारत की कंपनियां भी सबक लेकर अपने में बदलाव करेंगी।





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